Rechercher dans ce blog

Saturday, October 15, 2022

Mili Trailer: फ्रीजर में फंसी जाह्नवी कपूर, निकलने का नहीं रास्ता, डरावनी है 'मिली' की कहानी - Aaj Tak

जाह्नवी कपूर की फिल्म मिली का ट्रेलर आ गया है और ये बेहद डरावना है. फिल्म की कहानी मिली नौडियाल नाम की लड़की की कहानी पर आधारित है. फिल्म मिली, जाह्नवी कपूर की पहली फिल्म है, जिसमें उन्होंने अपने पिता बोनी कपूर संग काम किया है. इसका इंतजार काफी समय से फैंस कर रहे हैं. ऐसे में रिलीज हुआ फिल्म का ट्रेलर उनका उत्साह जरूर बढ़ाने वाला है.

मिली का ट्रेलर हुआ रिलीज 

मिली का ट्रेलर शुरू होता है, जाह्नवी कपूर के क्यूट अंदाज से. वह बताते हैं कि उनका नाम मिली नौडियाल है. मिली अपने पिता (मनोज पाहवा) के साथ रहती हैं. पिता की हर बात और आदत मिली को पता है. लेकिन जल्द ही वो उन्हें छोड़कर कनाडा जाने वाली हैं. ऐसे में उसके पिता दुखी भी हैं. दूसरी तरफ मिली का बॉयफ्रेंड (सनी कौशल) है, जिससे साथ वो जिंदगी बिताने के सपने देखती है. हंसती-खेलती मिली ने कभी नहीं सोचा था कि वो एक दिन ऐसा फंसेगी कि अपनी जान बचाने के लिए लाले पड़ जाएंगे.

ट्रेलर जैसे-जैसे आगे बढ़ता जाता है चीजें गंभीर होती जाती हैं. खुशमिजाज और मस्तीखोर मिली नौडियाल को आप एक फूड आउट्लेट में खड़े देखते हैं. इस जगह का नाम दून्स किचन है. यहां मिली काम करती है. देखने में ये जगह आम बर्गर जॉइन्ट जैसी है. यहां फ्राइज तली जा रही हैं. बर्गर बनाया जा रहा है और मशीन से कोल्ड ड्रिंक निकाली जा रही है. लेकिन फिर कहानी में वो मोड़ आता है, जो किसी बुरे सपने से कम नहीं है.

डरावनी है मिली की कहानी

रेस्टोरेंट के फ्रीजर में मिली नौडियाल किसी कारण से जाती है और पीछे से दरवाजा बंद हो जाता है. अब मिली, फ्रीजर के अंदर है और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है. इसके अलावा हर घंटे फ्रीजर का तापमान एक डिग्री घट रहा है. मिली का हाल पल-पल बिगड़ता जा रहा है. उनके हाथ पैर ठंड से लाल पड़ गए हैं. उनकी नाक से खून बह रहा है. ठंड से बचने और फ्रीजर से बाहर निकलने के लिए मिली जी जान लगा रही है. ट्रेलर के एक सीन में मिली प्लास्टिक रैप में लिपटकर जमीन पर पड़ी है. ये सीन सबसे दर्दनाक है. 

बाहर उसके बॉयफ्रेंड और पिता परेशान हैं क्योंकि मिली गायब हो गई है और किसी कोई आइडिया नहीं है कि वो कहा गई. पिता और पुलिस बॉयफ्रेंड की गर्दन पकड़े हुए हैं. अब मिली कैसे इस फ्रीजर से बाहर आएगी, आ पाएगी भी या नहीं और क्या वो जिंदा भी बच पाएगी, यही फिल्म में देखने वाली बात है. 

इस दिन सिनेमा में आएगी फिल्म

डायरेक्टर मथुकुट्टी जेवियर के निर्देशन में बनी फिल्म मिली, असल जिंदगी की घटना पर आधारित है. इस फिल्म का प्रोडक्शन बोनी कपूर ने जी स्टूडियो के साथ मिलकर किया है. फिल्म मिली 4 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. इसमें जाह्नवी कपूर के मनोज पाहवा, सनी कौशल और संजय सूरी अहम भूमिका निभाते नजर आएंगी.

Adblock test (Why?)


Mili Trailer: फ्रीजर में फंसी जाह्नवी कपूर, निकलने का नहीं रास्ता, डरावनी है 'मिली' की कहानी - Aaj Tak
Read More

Ex बॉयफ्रेंड के साथ उर्फी का बर्थडे सेलिब्रेशन, क्यों लिखा सॉरी? - Aaj Tak

खैर, हम तो यही दुआ करेंगे कि उर्फी हमेशा यूंही हंसती रहें. हैप्पी बर्थडे फैशन क्वीन

Source - Instagram

Adblock test (Why?)


Ex बॉयफ्रेंड के साथ उर्फी का बर्थडे सेलिब्रेशन, क्यों लिखा सॉरी? - Aaj Tak
Read More

Friday, October 14, 2022

'कांतारा' रिव्यू: एक देवता के मिथक की कहानी और ऋषभ शेट्टी की अद्भुत परफॉरमेंस पर्दे पर देखकर आप सन्न रह जाएंगे - Aaj Tak

KGF बनाने वाले होम्बाले फिल्म्स की अगली फिल्म 'कांतारा' कन्नड़ में बनी है और 30 सितंबर को थिएटर्स में रिलीज होने के बाद से जमकर तारीफ बटोर रही थी. उत्तर भारत में भी लोगों ने जबसे 'कांतारा' का ट्रेलर देखा था, वो इसे बड़ी स्क्रीन पर देखना चाहते थे. फैन्स की डिमांड स्वीकार करते हुए मेकर्स ने 14 अक्टूबर, शुक्रवार को 'कांतारा' को हिंदी डबिंग के साथ भी रिलीज कर दिया है. 

ओटीटी की पहुंच बढ़ने के बाद साउथ में बनी बहुत सारी फिल्मों को उत्तर भारत के सिनेमा फैन्स ने भी देखा है और हमेशा के लिए इन फिल्मों के फैन हो गए हैं. 'कांतारा' उन फिल्मों में से है जो अगर आपने अभी थिएटर्स में नहीं देखी और बाद में ओटीटी पर देखी, तो ये अफसोस रहेगा कि थिएटर्स में इसे देखने का एक्सपीरियंस क्यों मिस कर गए! 

मैंने 'कांतारा' नोएडा के थिएटर में देखी, जहां मेरे अलावा लगभग 15 लोग और थे. इनमें से अधिकतर 2-3 के ग्रुप में थे. फर्स्ट हाफ खत्म होने के बाद थिएटर में लोग फिल्म के बारे में आपस में बातें कर रहे थे, हंस-बोल रहे थे. लेकिन सेकंड हाफ में अंत के लगभग 40 मिनट पूरे थिएटर में जैसे सन्नाटा था. और फिल्म खत्म होने के बाद सब जैसे सन्न रह गए थे और एक दूसरे के चेहरे इस भाव में देख रहे थे कि 'स्क्रीन पर ये क्या देख लिया!' 

'कांतारा' की कहानी की जड़ में एक लोककथा है और पूरी फिल्म के नैरेटिव में एक वैसा ही सम्मोहन है जैसा लोककथाओं को सुनने में महसूस होता है. ऋषभ शेट्टी बतौर डायरेक्टर एक ऐसा संसार रचते हैं जिसे आप बहुत क्युरियोसिटी के साथ देखते रहते हैं. और वो इस फ्लो के साथ कहानी कहते हैं कि कोई भी मोमेंट खाली नहीं लगता और 'कांतारा' के संसार को देखते रहने की इच्छा बनी रहती है. बतौर एक्टर ऋषभ के कम के लिए सबसे सटीक एक ही शब्द लगता है- अद्भुत! 

'कांतारा' का मिथक
फिल्म में जंगल के बीच बस एक छोटे से गांव की कहानी है. 'कांतारा' का अर्थ होता है बीहड़ जंगल, और इस जंगल के निवासियों में सम्पन्नता लाने वाले एक देवता के मिथक की मान्यता है. इस देवता का सालाना अनुष्ठान 'भूत कोला' कहानी का एक कोर एलिमेंट है. 
कहा जाता है कि शांति की तलाश में भटकते एक राजा को, जंगल में पत्थर के रूप में ये देवता मिला और उसने एक शर्त रखी. शर्त ये कि जमीन का ये हिस्सा गांव वालों का रहेगा और राजा को शांति मिलेगी. इस शर्त के नियम को तोड़ने पर भारी विनाश होगा. 

कहानी 
फिल्म का लीडिंग किरदार है शिवा, जिसका परिवार पीढ़ियों से जंगल के देवता की पूजा-अनुष्ठान करता आया है. लेकिन शिवा एक पूरी तरह मनमौजी और पैशनेट लड़का है जो अपनी मौज मस्ती में रहता है. 'कांतारा' के पहले 30 मिनट में ही 'कंबाला' (भैंसे की दौड़) का एक सीक्वेंस है, जिससे आपको बता दिया जाता है कि शिवा जितना मौजी और बहादुर है, उतना ही रिएक्टिव भी यानी बहुत जल्दी भड़कता है. 'कांतारा' के फर्स्ट हाफ में शिवा, उसके साथी, जंगल से गांववालों का रिश्ता ये सबकुछ आप समझ जाएंगे.

कहानी में एक फॉरेस्ट ऑफिसर है मुरली (किशोर), जो सरकार की तरफ से जंगल का रखवाला है और उसके हिसाब से जंगल में गांववालों का दखल प्रकृति को नुक्सान पहुंचाने वाला है. ऐसे में जंगल को अपना प्लेग्राउंड मानने वाले शिवा से भी उसकी ठन जाती है. जंगल का जो मिथक कहानी की जड़ में है, उस कहानी के राजा का मौजूद वंशज देवेन्द्र सुत्तर (अच्युत कुमार) भी पूरे खेल में एक महत्वपूर्ण किरदार है. सवाल ये है कि गांववालों का आगे क्या होगा? क्या उनकी जमीनें सरकार के हाथ में जाएंगी? इस दौर में जब जमीनों के चक्कर में लोग गला काटने को तैयार हैं, तब क्या राजा का वंशज अपने पूर्वजों की मानी हुई देवता की शर्त निभाएगा? और इस पूरे खेल में शिवा और उसके पूर्वजों का जंगल के देवता से कनेक्शन किस तरह असर रखता है?

इन सवालों का जवाब 'कांतारा' जिस तरह स्क्रीन पर देती है, उसे पूरा देखने के बाद आपको थिएटर की सीट से उठने में कुछ मिनट का समय लगेगा. मुझे खुद थिएटर से बाहर आने के बाद भी, फिल्म से बाहर आने में थोड़ा वक्त लगा. 

क्या है खास?
'कांतारा' की कहानी हमारे देश में बहुत सारे ऐसे समुदायों और समाजों की तरह है जो जंगल से सीधे जुड़े हैं. शिव और उसके गांव वालों की तरह देश के बहुत सारे इलाकों के लोग इस तरह के संघर्ष के बीच फंसे रहते हैं. जंगल और इन्सान के रिश्ते पर वैसे भी सिनेमा में बहुत कम फिल्में हैं और 'कांतारा' इस लिस्ट में बहुत ऊपर रखी जा सकती है. 

टेक्निकली, 'कांतारा' एक बहुत दमदार फिल्म है. अरविन्द शेट्टी की सिनेमेटोग्राफी बहुत दमदार है. फिल्म में 'कंबाला' के खेल से लेकर भूत कोला और जंगल की पूरी सीनरी को कैमरा जिस तरह कैप्चर करता है उसमें नयापन तो लगता ही है, साथ ही थिएटर में मौजूद दर्शक खुद को स्क्रीन पर चिपका नहीं बल्कि कहानी में शामिल महसूस करता है. जैसे सबकुछ आंखों के सामने ही घट रहा हो.

स्पेशल इफेक्ट्स भी बहुत अच्छे हैं और कलर टोन आंखों को बहुत सुकून देने वाला है. 'कांतारा' के साउंड में दक्षिण कन्नड़ फोक का नेटिव फील तो है ही, साथ में एक रहस्यमयी एलिमेंट है जो जंगल के मिथक से जुड़ी कहानी को एक माया टाइप फील देने में बहुत खूब काम करता है. फिल्म की एक्शन कोरियोग्राफी भी बहुत कमाल की है. 

डायरेक्शन और परफॉरमेंस 
ऋषभ शेट्टी का स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन एक एनर्जी से भरा हुआ है. उनके नैरेटिव में एक फ्लो है जहां स्क्रीन पर कोई ढीला मोमेंट नहीं है और कहानी से कट जाने जैसा नहीं लगता. ढाई घंटे लम्बी फिल्म को उन्होंने पूरा टाइट रखा है और स्क्रीनप्ले की स्पीड नहीं हल्की पड़ती. उनके डायरेक्शन का दम तो स्क्रीन पर आपको दिखता ही है, लेकिन बतौर एक्टर उन्होंने जो किया है, वो जादुई से कम नहीं है.

शिवा के कैरेक्टर में उनकी रॉ एनर्जी पूरी फिल्म में बराबर फैली हुई है और स्क्रीन पर उनका पूरा ऑरा बहुत कमाल का है. फिल्म के आखिरी 40 मिनट रिषभ को देखकर आप समझ पाएंगे कि उनकी परफॉरमेंस में ऐसा क्या जादू है. अगर वो स्पॉइलर न होता, तो यहां जरूर बात करते. 

फॉरेस्ट ऑफिसर बने किशोर बहुत, राजा के वंशज के रोल में अच्युत और शिवा की लव इंटरेस्ट लीला के रोल में सप्तमी गौड़ा ने भी बेहतरीन काम किया है. 

कमियां
'कांतारा' दक्षिण कन्नड़ और तुलूनाडू इलाके की लोक कथाओं और लोक संस्कृति से बहुत गहरी जुड़ी हुई है. फिल्म मूलतः कन्नड़ में बनी है और हिंदी में डबिंग में देखने पर कहीं न कहीं कहानी के कल्चर और प्रतीओं को समझने में थोड़ी सी उलझन हो सकती है. मुझे इसलिए नहीं हुई क्योंकि मैंने 'कांतारा' की कहानी में घुले प्रतीकों, मिथकों और तुलूनाडू की संस्कृति के बारे में थोड़ा पढ़ा था. 'कांतारा' देखने से पहले अगर आपको कहानी के बैकग्राउंड को समझना हो तो यहां पढ़ें:

कांतारा: परशुराम के क्षेत्र से जंगल के लोगों और देवताओं की कहानी, हिंदी में भी लेकर आ रहे हैं KGF के मेकर्स

जो डायलॉग एक पर्टिकुलर भाषा और संस्कृति से जुड़े हों उन्हें हिंदी में बदलने में थोड़ा बहुत असर तो खोता ही है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि इससे कहानी कहीं कमजोर हो जाती हो. 'कांतारा' आपसे बस थोड़ा सा धैर्य और एकाग्रता चाहती है. इसके बदले में आपको जो सिनेमेटिक एक्सपीरियंस मिलेगा, वो शानदार और यादगार होगा. 

Adblock test (Why?)


'कांतारा' रिव्यू: एक देवता के मिथक की कहानी और ऋषभ शेट्टी की अद्भुत परफॉरमेंस पर्दे पर देखकर आप सन्न रह जाएंगे - Aaj Tak
Read More

BB16: 'अंकित की मां गला दबा लेंगी जब...', सौंदर्या की बात सुन फूट-फूटकर रोईं प्रियंका, बोलीं- सांस नहीं ले पा रही - Aaj Tak

बिग बॉस 16 में हर दिन हंगामा हो रहा है. तो भला ये बवाल वीकेंड का वार में क्यों ना हो. अपकमिंग एपिसोड में बीबी लवर्स को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिलेगा. जहां सलमान खान घरवालों के सामने एक दूसरे की पोल खोलेंगे. सुंबुल के सामने उनके दोस्त शालीन भनोट और टीना दत्ता को एक्सपोज किया गया. वहीं प्रियंका चहर चौधरी के सामने सौंदर्या शर्मा का ऐसा बयान आया जिसके बाद दोनों के बीच जंग छिड़ गई.

सौंदर्या और प्रिंयका में कैटफाइट

शुक्रवार के एपिसोड में सौंदर्या और प्रिंयका की कैटफाइट देखने को मिलेगी. दोनों के बीच सारा विवाद शुरू होता है एक टास्क से, जहां सलमान बीबी हाउस में आकर घरवालों की पोल पट्टी खोलते हैं. वे घरवालों को उनके बारे में पीठे पीछे कहे गए स्टेटमेंट को रिवील करते हैं. फिर होता है असली तमाशा. सलमान खान, सौंदर्या शर्मा की एक स्टेटमेंट बोलकर प्रियंका को बताते हैं. इसके बाद प्रियंका को इतना बुरा लगता है कि उनका रो रोकर बुरा हाल हो जाता है. दोनों हसीनाओं के बीच तू तू-मैं मैं भी देखने को मिलती है. 

सलमान ने पोली खोल

सलमान प्रियंका को कहते हैं- आपके बारे में किसी ने कहा है कि अंकित की मां अपना गला दबा लेंगी जब ये बहू बनकर जाएंगी. ये बात सुनते ही प्रियंका के होश उड़ जाते हैं. हमेशा चुप रहने वाले अंकित गुप्ता भी बोल पड़ते हैं. वे सौंदर्या पर निशाना साधते हुए उनके संस्कारों पर सवाल उठाते हैं, जिस पर सौंदर्या को गुस्सा आ जाता है. वे कहती हैं- आप मुझे मत बताओ, हमें बोलने की इजाजत है. प्रियंका गुस्से में रोते हुए सौंदर्या से कहती हैं कि वे सलमान खान के सामने जुबान लड़ा रही हैं उनके बारे में इतना गंदा बोलकर. रोती हुईं प्रियंका को उनके दोस्त अंकित गुप्ता शांत कराने की कोशिश करते हैं.

फूट-फूटकर रोईं प्रियंका

प्रियंका को प्रोमो वीडियो में फूट फूटकर रोते हुए देखा जा सकता है. वे रोते-रोते कहती हैं- मैं सांस नहीं ले पा रही हूं. अंकित गुप्ता पूरी कोशिश करते हैं  प्रिंयका को समझाने की. वो कहते हैं- तुम ऐसे लोगों के लिए रो क्यों रही हो? 

ये सब स्टोरी जानने के बाद आप इतना तो समझ गए होंगे कि बिग बॉस 16 का सेकंड वीकेंड का वार जबरदस्त होने वाला है. इसलिए आप रियलिटी शो में होने वाली ढेर सारी मस्ती और फन देखने के लिए तैयार रहिएगा.

Adblock test (Why?)


BB16: 'अंकित की मां गला दबा लेंगी जब...', सौंदर्या की बात सुन फूट-फूटकर रोईं प्रियंका, बोलीं- सांस नहीं ले पा रही - Aaj Tak
Read More

शालीन की बढ़ रहीं टीना दत्ता से नजदीकियां, एक्स वाइफ बोलीं- नेशनल टीवी पर मजाक मत बनवाओ - Aaj Tak

'बिग बॉस 16' में हर रोज इक्वेशन बदलती दिख रही है. शालीन भनोट और टीना दत्ता गेम के लिए लव एंगल बनाते दिख रहे हैं. एक एपिसोड में तो शालीन ने मजाक में ही सही, लेकिन टीना के प्रति अपने प्यार को जाहिर तक कर दिया था. हालांकि, टीना ने उन्हें रिप्लाई नहीं दिया, वह बात अलग है, लेकिन दर्शकों के बीच दोनों का प्यार जिस तरह से परवान चढ़ रहा है, इसको लेकर चर्चा जरूर हो रही है. और इसी बीच सामने आ रही हैं, शालीन भनोट की एक्स-वाइफ दलजीत कौर. 

दलजीत कौर को शालीन और टीना के बीच बढ़ रहीं नजदीकियों से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन उनका इतना जरूर कहना है कि जिस तरह से शालीन, नेशनल टेलीविजन पर उनके तलाक और बाकी की चीजों को लेकर खुलकर बात कर रहे हैं, वह ठीक नहीं. शालीन यह न भूलें कि उनका आठ साल का एक बच्चा है जो टीवी पर ये सारी बातें सुनकर परेशान हो सकता है. उसपर बुरा प्रभाव तक पड़ सकता है. 

शालीन की दोस्त नहीं हैं दलजीत
शालीन ने कुछ एपिसोड पहले टीना दत्ता संग उनके और दलजीत कौर के तलाक पर बात की थी. शालीन का यह तक कहना था कि दलजीत कौर और वह अच्छे दोस्त हैं. इसपर एक्ट्रेस ने ट्वीट कर सफाई दी थी. लिखा था कि नहीं, मैं तुम्हारी बेस्टफ्रेंड नहीं हूं शालीन. महीने में एक या दो बारी मिलना, वह भी बच्चे से, इससे हमारी दोस्ती नहीं हो जाती है. मैं तुम्हारी लव लाइफ की दुआ मांगती हूं, लेकिन मुझे या मेरे से जुड़ी चीजों को इन सबके बीच में मत लेकर आओ. और तुम इस बात को मजाक के तौर पर देख रहे हो? टीना तुम्हारे लिए मेरे मन में कोई हार्ड फीलिंग्स नहीं हैं.

टीना और शालीन की बढ़ती नजदीकियों पर किया दलजीत ने कॉमेंट
अब अपने इस बयान पर ही बॉम्बे टाइम्स संग बातचीत में दलजीत कौर ने कहा कि बिग बॉस के घर के अंदर जब शालीन ने मुझे अपना बेस्टफ्रेंड बताया तो अपसेट होने की जगह मैं थोड़ा ज्यादा परेशान इसलिए हो गई, क्योंकि मुझे यह बात पसंद नहीं आई जो उन्होंने टीना दत्ता से कही कि हम दोनों का रिश्ता एक छोटी सी चीज के पीछे टूटा. मैं भी बिग बॉस का हिस्सा रही हूं, सीजन 13 का. वहां मैं 15 दिन रही, लेकिन मैंने उस दौरान शालीन से जुड़ी कोई बात पर डिसकशन नहीं किया. न ही रिश्ते का मजाक बनाया और न ही ब्रेकअप को लेकर बात की. शालीन को कोई फोन नहीं आया, जब मैं बिग बॉस हाउस के अंदर थी. मुझे फोन्स आ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने नेशनल टीवी पर हमारे रिश्ते पर बात की है. जब मैं बिग बॉस में थी तो मैं आसानी से रोकर अपनी बातें वहां रख सकती थी. जनता को अपने टूटे रिश्ते के बारे में बता सकती थी, लेकिन मैंने नहीं किया. 

तलाक के सदमे से बाहर निकलने में लगे सात साल
दलजीत कौर ने टीना दत्ता और शालीन के बीच बढ़ रहीं नजदीकियों पर कॉमेंट कर कहा कि अगर दोनों साथ में रहते हैं तो मुझे इस बात से फर्क नहीं पड़ता. दोनों खुश रहें, मैं तो यही चाहूंगी. मैं अपने हैप्पी स्पेस में हूं. मैं बस यह नहीं चाहती कि मेरा आठ साल का बेटा जेडन नेशनल टीवी पर ये सारी चीजें देखे और सुने. दलजीत कौर ने शालीन पर फिजिकल अब्यूज और दहेज की मांग रखने का आरोप लगाया था. इसपर कॉमेंट न करने के लिए पहले तो दलजीत कौर ने कहा, फिर बाद में बोलीं कि वह सब बीत चुका है और मैं अपने बीते हुए कल की बात नहीं करना चाहती. सात साल लगे मुझे इससे बाहर निकलने में और अब मैं खुद को एक मजबूत इंसान देखती हूं. मैं यह नहीं कहूंगी कि जब कोई शादी टूटती है तो उसमें हमेशा पुरुष की ही गलती होती है, महिला की भी गलती हो सकती है. शालीन को यह समझना होगा कि तलाक की बात वह नेशनल टीवी पर न करे और उसका मजाक न बनवाए. मैं समझती हूं कि वह बिग बॉस में हैं और पर्सनल चीजें इस शो में बाहर आती हैं, लेकिन उसे थोड़ा आत्मसम्मान बनाकर रखना होगा और इन बातों को करने से बचना भी होगा. मैं चाहती हूं कि किस्मत उन्हें दूसरा चांस दे और हम दोनों ही अपनी-अपनी लाइफ में आगे बढ़ें. बीते हुए कल की ओर मुड़कर न जाएं. 

Adblock test (Why?)


शालीन की बढ़ रहीं टीना दत्ता से नजदीकियां, एक्स वाइफ बोलीं- नेशनल टीवी पर मजाक मत बनवाओ - Aaj Tak
Read More

Doctor G Film Review: बिखरी सी लगती है 'डॉक्टर जी' की कहानी, मिसिंग है 'आयुष्मान टच' - Aaj Tak

जेंडर इक्वालिटी हमेशा से डिबेटेबल मुद्दा रहा है. एजुकेशन का फील्ड भी इससे अछूता नहीं है. मर्दों और औरतों को क्या पढ़ाई करनी चाहिए, इसका निर्णय भी सोसायटी द्वारा खींचे दायरे में रहकर ही लेना पड़ता है. मसलन अगर कोई लड़का गाइनोकॉलजिस्ट और लड़की सीविल इंजीनियर करना चाहती हैं, तो उसकी चॉइस को जज किया जाता है. कुछ ऐसी ही मुद्दों पर डॉक्टर जी की कहानी का ताना-बाना बुना गया है.


कहानी 
भोपाल के उदित गुप्ता (आयुष्मान खुराना) मेडिकल स्टूडेंट हैं और लंबे समय से ऑर्थोपिडिशियन बनने का सपना देख रहे हैं. रैंक कम होने की वजह से उनके नसीब में आती है गाइनोकॉलजिस्ट की सीट. उदित इससे खुश नहीं हैं क्योंकि उदित मानते हैं कि ये डिपार्टमेंट महिलाओं का है. हालांकि दूसरा ऑप्शन नहीं मिलने की वजह से मन मारकर उदित दाखिला लेते हैं. अब यहां से शुरू होती है उदित की अग्नि-परीक्षा. डिपार्टमेंट में एकमात्र मेल स्टूडेंट उदित की जर्नी कई रोलर-कोस्टर राइड लेते हुए आगे बढ़ती है. जहां उसकी मुलाकात सीनियर फातिमा (रकुलप्रीत) से होती है. क्या उनकी दोस्ती प्यार में तब्दील हो पाती है? और क्या उदित गाइनोकॉलजिस्ट बनना स्वीकार कर लेते हैं? यह सब जानने के लिए आपको थिएटर की ओर रुख करना होगा. 

डायरेक्शन 
गैंग्स ऑफ वासेपुर, देव डी जैसी फिल्मों की असिस्टेंट डायरेक्टर रह चुकीं अनुभूति कश्यप 'डॉक्टर जी' से अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू कर रही हैं. अनुभूति ने बेशक इस फिल्म के जरिए एक अलग कहानी चुनी है लेकिन स्क्रिनप्ले और कहानी के बिखराव की वजह से फिल्म से आप ज्यादा कनेक्ट महसूस नहीं कर पाते हैं. फिल्म का फर्स्ट हाफ बहुत ही लंबा प्रतीत होता है, कुछेक सीन्स को छोड़ दिया जाए, तो इंटरवल तक आते-आते आप ऊब जाते हैं. वहीं सेकेंड हाफ पहले की तुलना में बेहतर लगता है. कहानी में कुछ इंट्रेस्टिंग मोड़ आते हैं जिसमें आपकी थोड़ी बहुत दिलचस्पी जगती है. ओवरऑल दो घंटे का टाइमफ्रेम होने के बावजूद फिल्म बोझिल सी लगती है. दरअसल इसका सबसे बड़ा ड्रॉ-बैक यही है कि किसी एक टॉपिक पर फोकस न होकर कई और मुद्दों को जबरदस्ती घुसाने की कोशिश की गई है. मसलन एक लड़के का गाइनो डिपार्टमेंट में होता स्ट्रगल, सिंगल मां की ख्वाहिशें, जेंडर इन-इक्वालिटी, रैगिंग, मेल टच(इगो) आदि कई पहलुओं को टच करती फिल्म किसी एक खास मुद्दे पर आकर नहीं रुकती है और यही वजह से कि आप फिल्म से कनेक्शन बना पाने में हेल्पलेस महसूस करने लगते हैं. हालांकि फिल्म में कुछेक कॉमिक सीन्स और डायलॉग्स ऐसे हैं, जो बोझिल फिल्म से बने माहौल को थोड़ा लाइट करते हैं, लेकिन ऐसे मौके बहुत कम मिले हैं. 

टेक्निकल 
इशित नरेन की सिनेमैटोग्राफी ठीक रही है. अस्पताल का ऑपरेशन रूम हो या चाहे भोपाल शहर, इशित ने फ्रेम दर फ्रेम फिल्म को बढ़िया तरीके से प्रेजेंट किया है. हां, यहां एडिटर प्रेरणा सहगल का काम औसत मान सकते हैं. खासकर फर्स्ट हाफ में उनकी एडिटिंग के स्किल की बेहद जरूरत थी. फिल्म के म्यूजिक डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी अमित त्रिवेदी ने संभाली है. उनका गाना 'न्यूटन' का फिल्म के दौरान फिट बैठता है. हालांकि अमित से उम्मीदें कहीं ज्यादा हैं, तो इस फिल्म में उनका काम अप टू द मार्क नहीं लगता है. केतन सोधा का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की हर इमोशन को बिल्डअप करने में फ्यूल का काम कर रहा था.  

एक्टिंग 
सोशल मैसेज में कॉमिडी का तड़का लगाने में माहिर आयुष्मान यहां थोड़े फीके नजर आते हैं. अपनी पिछली फिल्मों की तरह लहजा पकड़ने में 'प्रो' रहे आयुष्मान का यहां भोपाली हिंदी बोलना उतना नैचुरल नहीं लगता है. डॉ फातिमा के रूप में रकुलप्रीत का काम भी डिसेंट रहा है. सिल्वर स्क्रीन पर पहली बार साथ नजर आए रकुल और आयुष्मान की जुगलबंदी भी खास मैजिक क्रिएट नहीं कर पाती है. हां, यहां अगर कोई इंप्रेस करती हैं, तो वो हैं आयुष्मान की मां बनीं शीबा चड्ढा, उनका किरदार जीवन से भरा है. आज की जनरेशन के बीच खुद को फिट करने की जद्दोजहद करतीं शीबा की मासूमियत आपका दिल जीत लेगी. उनके किरदार में लेयर्ड हैं और आपको उनका हर शेड्स पसंद आता है. इसके साथ टफ प्रोफेसर बनीं में शेफाली शाह का भी काम उम्दा रहा है. दोस्त के रूप में अभिनय राज सिंह की सहजता भी स्क्रीन पर साफ नजर आती है. 

क्यों देखें 
एक लाइट हार्टेड कॉमिडी संग सोशल मैसेज देती फिल्म को एक मौका दिया जा सकता है. हां, अगर आप फुल टू एंटरटेन होने के मकसद से थिएटर जा रहे हैं, तो शायद आप निराश होकर निकलें. 

Adblock test (Why?)


Doctor G Film Review: बिखरी सी लगती है 'डॉक्टर जी' की कहानी, मिसिंग है 'आयुष्मान टच' - Aaj Tak
Read More

Wednesday, October 12, 2022

शिखर धवन पर आया हुमा कुरैशी का दिल, सपनों में आए क्रिकेटर तो मम्मी ने यूं कराया हकीकत से सामना - NDTV India

शिखर धवन पर आया हुमा कुरैशी का दिल, सपनों में आए क्रिकेटर तो मम्मी ने यूं कराया हकीकत से सामना

शिखर धवन पर आया हुमा कुरैशी का दिल

नई दिल्ली :

Shikhar Dhawan Bollywood Debut: हुमा कुरैशी (Huma Qureshi) और सोनाक्षी सिन्हा (Sonakshi Sinha) स्टारर डबल XL (Double XL) का सुपर एंटरटेनिंग ट्रेलर फाइनली रिलीज हो गया है. फिल्म जहां अपनी अलग हट के स्क्रिप्ट को लेकर चर्चा में है तो वहीं इस फिल्म से लोकप्रिय क्रिकेटर शिखर धवन डेब्यू करने जा रहे हैं. फिल्म 4 नवंबर, 2022 को थिएटर स्क्रीन पर रिलीज होने वाली है. फिल्म के ट्रेलर में हुमा कुरैशी और शिखर धवन रोमांस करते नजर आ रहे हैं.

यह भी पढ़ें

बता दें कि शिखर धवन टीम इंडिया के कप्तान रह चुके हैं और कई सीरीज़ की जीता चुके हैं. डबल एक्सएल के ट्रेलर में दिख रहा है कि वह हुमा कुरैशी के साथ हाथों में हाथ डाले रोमांस कर रहे हैं. ब्लैक सूट में शिखर धवन एक्ट्रेस के साथ डांस स्टेप्स कर रहे हैं और काफी हैंडसम दिख रहे हैं. शिखर धवन ने फिल्म का ट्रेलर अपने इंस्टा अकाउंट पर शेयर किया है. 

हाल ही में पिंक विला से बातचीत में शिखर धवन कहा, “देश के लिए खेलने वाले एथलीट के तौर पर ज़िंदगी काफी व्यस्थ रहती है. अच्छी फिल्म देखना मेरा पसंदीदा मनोरंजन है. जब मेरे पास यह मौका आया और मैंने कहानी सुनी तो कहानी मुझे काफी पसंद आया. यह समाज के लिए बहुत अच्छा मैसेज है. मुझे उम्मीद है कि इस फिल्म को देखने के बाद कई नौजवान लड़के और लड़कियां अपने सपनों का पीछा करेंगे, फिर वो चाहें कुछ भी हो.”


सतराम रमानी द्वारा निर्देशित यह फिल्म बॉडीवेट स्टीरियोटाइप को चुनौती देती नजर आती है. इस फिल्म को मेरठ, दिल्ली और लंदन में शूट किया गया है. डबल एक्सएल दो प्लस-साइज़ महिलाओं के जर्नी को दिखाया गया है. इस फिल्म में हुमा कुरैशी एक स्पोर्ट्स प्रेजेंटर के रोल में हैं, जबकि सोनाक्षी सिन्हा एक उभरते स्टाइलिस्ट के रोल में हैं. इस फिल्म के लिए दोनों ही एक्ट्रेस ने अपना काफी वजह बढ़ाया हैं.
 
फिल्म में जहीर इकबाल और महत राघवेंद्र मेल एक्टर हैं. डबल एक्सेल गुलशन कुमार, टी-सीरीज, वाकाओ फिल्म्स और मुदस्सर अजीज द्वारा प्रस्तुत किया गया है. 
 

Adblock test (Why?)


शिखर धवन पर आया हुमा कुरैशी का दिल, सपनों में आए क्रिकेटर तो मम्मी ने यूं कराया हकीकत से सामना - NDTV India
Read More

OTT Release: एनिमल-कर्मा कॉलिंग... भौकाल मचा रही ये फिल्में-वेब सीरीज, वीकेंड का मजा होगा दोगुना - Aaj Tak

इस वीकेंड की लिस्ट के साथ हम तैयार हैं. अग लॉन्ग वीकेंड का मजा दोगुना करना चाहते हैं तो आप अमेजन प्राइम, नेटफ्लिक्स और सोनी लिव के अलावा जी...