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Friday, March 3, 2023

Miss Universe Sushant Sen को क्यों आया Heart Attack ? जानिए Sushant Sinha से - TIMES NOW Navbharat

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Miss Universe Sushant Sen को क्यों आया Heart Attack ? जानिए Sushant Sinha से - TIMES NOW Navbharat
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फिल्मी इंस्पेक्टर इफ्तिखार जिन्हें लोग समझते थे असली पुलिस: ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर भी हवलदार करते थे सैल्... - Dainik Bhaskar

3 घंटे पहलेलेखक: अरुणिमा शुक्ला

1970 से 90 के दौरान की ज्यादातर बॉलीवुड फिल्मों में आपने एक दुबले-पतले, लेकिन रौबदार पुलिस इंस्पेक्टर को जरूर देखा होगा। इनका नाम है इफ्तिखार। 1944 के आसपास वे सिंगर बनने घर से निकले थे, लेकिन एक्टर बन गए। इफ्तिखार पुलिस इंस्पेक्टर के रोल में इतना जंचते थे कि असल में भी लोग इन्हें पुलिस अधिकारी ही समझते थे। ट्रैफिक सिग्नल पर हवलदार इन्हें देखकर सैल्यूट किया करते थे।

इफ्तिखार गजब के पेंटर भी थे। अशोक कुमार को इन्होंने पेंटिंग सिखाई थी और वो ताउम्र इफ्तिखार को अपना गुरु ही मानते रहे। जब देश का बंटवारा हो रहा था, तब इनका पूरा परिवार पाकिस्तान जाकर बस गया। ये भारत में रुक गए। कोलकाता में भारी दंगों के कारण जान बचाने के लिए ये मुंबई आ गए। कुछ फिल्मों में बतौर हीरो भी रहे, लेकिन धीरे-धीरे सपोर्टिंग आर्टिस्ट बनते गए।

बी.आर. चोपड़ा की फिल्म इत्तेफाक में इन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर का रोल इतने अच्छे तरीके से निभाया कि फिर इन्हें वैसे ही रोल मिलने लगे। इन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें से ज्यादातर में पुलिस इंस्पेक्टर, वकील, डॉक्टर या जज ही बने। इफ्तिखार को अपनी बेटियों से बहुत प्यार था। बेटी सईदा को कैंसर हुआ तो ये सदमा वो सह नहीं पाए। बेटी की मौत हुई तो उसकी याद में खुद भी 21 दिन में ही चल बसे।

बॉलीवुड की फिल्मों पर इफ्तिखार का गहरा प्रभाव रहा। आज भी जब किसी फिल्मी पुलिस इंस्पेक्टर का जिक्र होता है तो सबसे पहले इफ्तिखार का चेहरा ही सामने आता है। आज की अनसुनी दास्तानें में इन्हीं इफ्तिखार की कहानी...

अशोक कुमार के साथ इफ्तिखार। करियर के शुरुआती दिनों में अशोक कुमार ने उनकी बहुत मदद की थी।

अशोक कुमार के साथ इफ्तिखार। करियर के शुरुआती दिनों में अशोक कुमार ने उनकी बहुत मदद की थी।

बचपन से सपना केएल सहगल जैसा नामी सिंगर बनने का
इफ्तिखार का जन्म 22 फरवरी 1924 को जालंधर में हुआ था। उनका पूरा नाम सैयदना इफ्तिखार अहमद शरीफ था। ये चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके पिता एक कानपुर में एक कंपनी में बड़े पद पर तैनात थे। उन्होंने कभी भी एक्टर बनने के बारे में नहीं सोचा था। उनका बचपन से ही सिंगर कुंदन लाल सहगल के जैसे नामी सिंगर बनने का सपना था। वो सहगल साहब के अंदाज में भी गाते थे, जिस वजह से आस-पास के लोग उन्हें जानने लगे थे।

इफ्तिखार को पेंटिंग का भी शौक था। इस शौक को पूरा करने के लिए उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद लखनऊ कॉलेज ऑफ आर्ट्स से पेंटिंग में डिप्लोमा कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान संगीत पर लगा दिया।

सिंगिंग में हाथ आजमाने गए थे, फिल्म का ऑफर मिल गया
किस्सा 1944 का है, जब फिल्म इंडस्ट्री का बहुत बड़ा हिस्सा कोलकाता में रहता था। एक दिन इफ्तिखार ने अपने पिता से कहा कि वो कोलकाता जाकर सिंगर बनना चाहते हैं। गायकी में उनकी पकड़ अच्छी थी, इसलिए पिता ने 20 साल के इफ्तिखार को कोलकाता भेज दिया। यहां पहुंचने के बाद वो HMV म्यूजिक कंपनी के दफ्तर गए, जहां उन्होंने ऑडिशन दिया। वहां पर मौजूद म्यूजिक कंपोजर कमल दासगुप्ता को सिंगिंग के साथ-साथ उनकी पर्सनैलिटी भी बहुत पसंद आई। उन्होंने कहा कि तुम्हें सिंगर नहीं, एक्टर बनना चाहिए। साथ ही एक फिल्म का ऑफर भी दे डाला। इफ्तिखार ने वो फिल्म साइन कर ली। हालांकि उस फिल्म के बारे में कहीं ज्यादा डिटेल्स मौजूद नहीं हैं।

खुद का म्यूजिक एल्बम रिलीज किया
इस फिल्म में वो बतौर एक्टर नजर आए थे, लेकिन सिंगिंग के लिए उनका जुनून कम नहीं हुआ था। गायकी में कहीं बड़ा प्लेटफॉर्म नहीं मिलने की वजह से इफ्तिखार ने ठान लिया था कि वो खुद के गाने का एक एल्बम निकालेंगे। एल्बम रिलीज भी हुआ। इस एल्बम के दो गाने लोगों ने बहुत पसंद किए थे। इसके बाद वो कानपुर चले गए। वो कानपुर पहुंचे ही थे तभी एक प्रोड्यूसर ने उन्हें टेलीग्राम भेज कर वापस बुला लिया। इस बार भी उनके पिता ने कोलकाता भेज दिया, लेकिन इफ्तिखार के बाकी रिश्तेदार इस बात से बेहद खफा थे कि वो वापस कोलकाता एक्टर बनने के लिए जा रहे हैं।

इफ्तिखार ने 1940 से 1990 के दशक तक अपने करियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग की।

इफ्तिखार ने 1940 से 1990 के दशक तक अपने करियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग की।

यहूदी लड़की से प्यार और उसी से शादी
कोलकाता में इफ्तिखार की शादी सईदा नाम की लड़की से तय हुई थी। कुछ समय बाद कोलकाता में उनकी ही बिल्डिंग में रहने वाली एक यहूदी लड़की हना जोसेफ को इफ्तिखार पसंद करने लगे। कुछ समय बाद दोनों दोस्त बन गए। कुछ समय बाद हना भी उन्हें पसंद करने लगीं और दोनों ने शादी करने का फैसला किया।

इफ्तिखार की शादी पहले से ही तय थी, लेकिन वो हना के साथ ही अपना घर बसाना चाहते थे। जिस वजह से बाद में सईदा के साथ अपना रिश्ता तोड़कर उन्होंने हना से शादी कर ली। उनके परिवाले पहले इस रिश्ते के खिलाफ थे, लेकिन बाद में मान गए थे। शादी के बाद हना ने अपना नाम बदलकर रेहाना अहमद रख लिया था। 1946 में उनकी बड़ी बेटी सलमा का जन्म हुआ और 1947 में उनकी पत्नी ने दूसरी बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम सईदा रखा गया।

कोलकाता वापस आने के बाद इफ्तिखार की फिल्म तकरार रिलीज हुई, जिसमें वो उस जमाने की टॉप एक्ट्रेस जमुना के साथ नजर आए थे। इसके बाद 1945 की उनकी दो और फिल्में रिलीज हुईं।

विभाजन में परिवार पाकिस्तान में जा बसा
इफ्तिखार के करियर में सब कुछ अच्छा चल रहा था कि तभी भारत-पाकिस्तान का विभाजन हो गया। इस विभाजन का दंश उन्हें भी झेलना पड़ा। रिश्तेदार समेत उनके परिवार वाले भी भारत छोड़कर पाकिस्तान बसने चले गए, लेकिन इफ्तिखार ने भारत में ही रुकने का फैसला किया। सिर्फ इतना ही नहीं, वो जिस फिल्म कंपनी में काम कर रहे थे, वहां से उन्हें निकाल दिया गया।

इफ्तिखार ने 'बंदिनी', 'सावन भादों', 'खेल खेल में' और 'एजेंट विनोद' में निगेटिव रोल भी किया।

इफ्तिखार ने 'बंदिनी', 'सावन भादों', 'खेल खेल में' और 'एजेंट विनोद' में निगेटिव रोल भी किया।

कोलकाता में दंगे हुए तो जान बचाने के लिए मुंबई आए
कोलकाता में दंगे इतने भड़क गए थे कि उन्होंने परिवार सहित मुंबई का रुख करने का फैसला किया। मुंबई में ये संगीतकार अनिल बिस्वास को जानते थे, फिर उन्हीं के दोस्तों के साथ इफ्तिखार की भी दोस्ती हो गई। यहां पर काम की तलाश में उन्हें बरसों भटकना पड़ा।

मुंबई के संघर्ष को याद करते हुए इफ्तिखार की बड़ी बेटी सलमा ने एक इंटरव्यू में बताया था- “मैं और मेरी बहन, दोनों बहुत छोटे थे और अक्सर हमारे खाने तक के लिए घर में कुछ नहीं होता था। घर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए मम्मी को किन्हीं मिस्टर पाटनवाला के ऑफिस में सेक्रेटरी की नौकरी करनी पड़ी। उधर छोटा-मोटा जैसा भी काम मिलता रहा, डैडी करते रहे, लेकिन हमारी माली हालात में कोई बदलाव नहीं आया।”

अशोक कुमार के गुरु थे इफ्तिखार
मुंबई आने के बाद उनकी मुलाकात अशोक कुमार से हुई। बाद में अशोक कुमार की वजह से इफ्तिखार को फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने लगे। इफ्तिखार एक जबरदस्त पेंटर भी थे। अशोक कुमार ने उन्हीं से पेंटिंग बनानी भी सीखी। उम्र में बड़ा होने के बावजूद वो इफ्तिखार को हमेशा अपना गुरु मानते थे।

इफ्तिखार अशोक कुमार के गुरु कैसे बने, ये किस्सा भी मजेदार है। एक बार अशोक कुमार बहुत बीमार हो गए थे, जिस वजह से वो कई दिनों तक बेड पर रहे। कुछ काम ना कर पाने की वजह से वो चिड़चिड़े भी हो गए थे। इसी बीच इफ्तिखार उनको देखने घर गए। अशोक कुमार की ऐसी हालत देख कर उन्होंने कहा- आपको इस समय वो काम करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले। अशोक कुमार ने कहा- मुझे पेंटिंग का शौक है, लेकिन बनानी नहीं आती। इसके बाद इफ्तिखार ने उन्हें पेंटिंग सिखाई।

ये वही पेंटिंग है, जो इफ्तिखार ने किशोर कुमार की फिल्म ‘दूर गगन की छांव में’ के टाइटल पोस्टर के बैकग्राउंड के लिए बनाई थी।

ये वही पेंटिंग है, जो इफ्तिखार ने किशोर कुमार की फिल्म ‘दूर गगन की छांव में’ के टाइटल पोस्टर के बैकग्राउंड के लिए बनाई थी।

पुलिस के रोल ने बदल दी इफ्तिखार की किस्मत
किस्सा अब उस फिल्म का जिसके बाद से इफ्तिखार को फिल्मों का पुलिस ऑफिसर कहा जाने लगा। फिल्म का नाम था इत्तेफाक। इसमें इफ्तिखार ने पहली बार पुलिस ऑफिसर का रोल निभाया था। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने जबरदस्त कमाई की थी। इस फिल्म ने उनकी किस्मत बदल दी थी। जिसके बाद इफ्तिखार के पास काम की कमी नहीं रही। जल्द ही उन्होंने मुंबई के खार में अपना फ्लैट खरीद लिया। इसके बाद उन्होंने जॉनी मेरा नाम, दीवार, डॉन जैसी बेहतरीन फिल्मों में पुलिस ऑफिसर का रोल निभाया।

इफ्तिखार की बेटी सलमा ने बताया था कि फिल्म इत्तेफाक के बाद डैडी का करियर पटरी पर आ गया।

इसका श्रेय मैं अशोक कुमार अंकल को देना चाहूंगी जिनकी सिफारिश पर डैडी को “बी.आर.फिल्म्स” में एंट्री मिली थी।

असली पुलिस ऑफिसर समझ कर ट्रैफिक पुलिस सैल्यूट करती थी
पुलिस ऑफिसर के रोल में इफ्तिखार इतने फेमस हो गए थे कि रियल लाइफ में भी लोग उन्हें पुलिस ऑफिसर समझते थे। एक बार का किस्सा ये है कि वो ट्रैफिक सिग्नल से गुजर रहे थे, तभी वहां मौजूद पुलिस वाले उन्हें सैल्यूट करने लगे। इस बात से पहले तो उन्हें हैरानी हुई, लेकिन बाद में वो चुपचाप वहां से गुजर गए। ऐसा वाकया उनके साथ कई बार हुआ था।

कई बार तो उन्होंने ट्रैफिक सिग्नल भी तोड़ दिया, लेकिन पुलिस वाला समझ कर उन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।

एक बार इफ्तिखार पत्नी हना के साथ कहीं बाहर जा रहे थे। वो नो एंट्री लेन से गुजर ही रहे थे कि उन्हें पुलिस वाले ने रोक लिया। पुलिस वाले ने जैसे ही कार में इफ्तिखार को देखा, उन्हें सलाम किया और बिना जुर्माना लिए जाने दिया।

बड़ी बेटी की शादी हुई और 15 साल बाद तलाक
1964 में इफ्तिखार की बड़ी बेटी सलमा की शादी देहरादून के एक रईस खानदान से ताल्लुक रखने वाले विपिन चन्द्र जैन से हो गई थी। विपिन चन्द्र मुंबई एक्टर बनने आए थे, जहां पर उनकी मुलाकात सलमा से हुई। पहले दोनों दोस्त बने, फिर प्यार हुआ और बाद में दोनों ने लव मैरिज कर ली।

शादी के बाद सलमा पति के साथ देहरादून चली गई, जहां वो एक कॉलेज में पढ़ाने लगी। इस दौरान उन्होंने एक बेटी और बेटे को भी जन्म दिया। शादी के 15 साल बाद उनका तलाक हो गया जिसके बाद वो मुंबई आ गईं। यहां पर उन्होंने 20 सालों तक सेक्रेटरी के तौर पर एन.सी. सिप्पी का ऑफिस संभाला।

70 से लेकर 80 का दशक, इफ्तिखार के करियर का खूबसूरत सफर रहा।

70 से लेकर 80 का दशक, इफ्तिखार के करियर का खूबसूरत सफर रहा।

राजेश खन्ना के साथ भी खूब जमी जोड़ी
उन्होंने राजेश खन्ना के साथ भी खूब काम किया। वो 'जोरू का गुलाम', 'द ट्रेन', 'खामोशी', 'महबूब की मेहंदी', 'राजपूत' और 'आवाम' जैसी फिल्मों में नजर आए।

पिता और दादाजी के रोल में भी जंचे इफ्तिखार
पुलिस ऑफिसर के अलावा इफ्तिखार ने दूसरे बेहतरीन रोल भी किए थे। उन्होंने पिता, अंकल, ग्रेट-अंकल, दादाजी, कोर्टरूम जज और डॉक्टर के किरदार निभाए और उन्हें काफी पसंद भी किया गया।

जमींदार ने वहीदा रहमान की उंगली काटी, फिर इफ्तिखार को मिला रोल
किस्सा फिल्म तीसरी कसम का है। इस फिल्म में पहले जमींदार के रोल में एक असली जमींदार ने काम किया था। डायरेक्टर का मानना था कि फिल्म में रियल टच ज्यादा रहेगा। उसे एक्टिंग नहीं आती थी, लेकिन सीन के हिसाब से उसे ट्रेनिंग दी गई थी।

एक सीन था जिसमें जमींदार को हीराबाई के रोल में नजर आईं वहीदा रहमान से कहना होता था कि आप अपने हाथ से पान खिला दीजिए। डायरेक्टर ने जैसे ही सीन खत्म होने के बाद कट बोला, वैसे ही जमींदार ने वहीदा की एक उंगली काट ली। उसे लगा कट इसीलिए बोला गया होगा। इसके बाद बहुत हंगामा हुआ।

इसके बाद जमींदार को फिल्म से निकाल कर इफ्तिखार को जमींदार के रोल में कास्ट किया गया।

अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म डॉन, दीवार और जंजीर जैसी बेहतरीन फिल्मों में दिखे थे।

अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म डॉन, दीवार और जंजीर जैसी बेहतरीन फिल्मों में दिखे थे।

हाॅलीवुड फिल्मों में भी काम किया
हिंदी फिल्मों के अलावा इफ्तिखार 1967 में अमेरिकन टीवी सीरीज 'माया' में नजर आए थे। इसके अलावा उन्होंने 1970 में हाॅलीवुड फिल्मों में 'बॉम्बे टॉकीज' और 1992 में 'सिटी ऑफ जॉय' में भी काम किया।

बेटी को कैंसर हुआ तो तकिए में मुंह छुपाकर रोते थे
इफ्तिखार अपनी छोटी बेटी सईदा को सबसे ज्यादा चाहते थे। एक दिन सईदा बहुत बीमार पड़ी, जिसके बाद जांच में पता चला कि उन्हें कैंसर है। इसके बाद इफ्तिखार ने 5 साल तक उनकी देखभाल की। तनाव और डिप्रेशन ने उन्हें मार डाला था। बेटी की ऐसी खराब हालत देख कर वो रोज रात में तकिए में मुंह छुपाकर रोते थे।

7 फरवरी 1995 को सईदा की कैंसर से मौत हो गई। बेटी की मौत ने इफ्तिखार को झकझोर कर रख दिया। अपने सामने अपनी बच्ची को मरता देखना उनके लिए एक दर्दनाक एहसास था और ये सदमा वो बर्दाश्त नहीं कर पाए।

बेटी की मौत के 21 दिन बाद इफ्तिखार का निधन
बेटी के गुजरने के बाद वो बुरी तरह से बीमार पड़ गए। लोगों से मिलना-जुलना सब बंद कर दिया। खाने-पीने का कोई होश नहीं रहता था। दिन-रात बस सईदा की याद में अंदर ही अंदर घुटते रहते थे। नतीजा, बेटी की मौत के एक महीने के अंदर ही 1 मार्च को इफ्तिखार का 71 साल की उम्र में निधन हो गया।

कई रिपोर्ट में ये दावा किया गया था कि उनका निधन 1 मार्च को नहीं बल्कि 4 मार्च को हुआ था। इन दावों को इफ्तिखार के रिश्तेदारों ने खारिज कर दिया था। रिश्तेदारों ने बताया था कि उनका निधन 1 मार्च 1995 को हुआ था।

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Thursday, March 2, 2023

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  • Published: March 03 2023, 11:12 AM IST

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Jawan से पहले इन ब्लॉकबस्टर फिल्मों को लात मार चुके हैं Allu Arjun, फिर भी कोई नहीं हिला पाया स्टारडम !! - Bollywood Life हिंदी

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विलेन से की शादी, वो असल में खलनायक निकला: अमीरबाई ने तलाक के बदले पति को दी कार, उसी से अपहरण किया, कमरे म... - Dainik Bhaskar

5 घंटे पहलेलेखक: नितिन उपाध्याय

महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन था "वैष्णव जन तो तेने कहिए"। ये गुजराती भजन था और इसे गाया था एक कन्नड़ गायिका अमीरबाई कर्नाटकी ने। महात्मा गांधी अमीरबाई के इस भजन के मुरीद थे और इसी भजन के लिए वो अमीरबाई के भी फैन थे। अमीरबाई कन्नड़, हिंदी और मराठी गानों की गायिका भी थीं और फिल्मों की नायिका भी। हिंदी सिनेमा की शुरुआती गायिकाओं में इनका नाम शुमार है।

अगर आज पूरे देश के सिनेमा की एक्ट्रेसेस अपने नाम और रुतबे पर फख्र कर सकती हैं तो वो सिर्फ अमीरबाई और उनकी कुछ साथियों की वजह से। जिस जमाने में लड़कियों का सिनेमा में काम करना इतना बुरा माना जाता था कि परिवार उन लड़कियों से रिश्ते तोड़ लेता था। हत्या तक कर देता था। उन लड़कियों को तवायफों में गिना जाता था, तब एक्टिंग और सिंगिंग में सम्मान पाने के लिए अमीरबाई ने ही इसके लिए पूरे समाज से लड़ाई लड़ी थी।

अमीरबाई कर्नाटक के बीजापुर में जन्मीं थीं। जन्म तारीख का कोई रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि उनका जन्म 1912 में हुआ था। इसी साल पहली भारतीय फिल्म राजा हरिश्चंद्र भी बनी थी। माता-पिता अमीना बी और हुसैन साब दोनों गायिकी और थिएटर से जुड़े थे, इसलिए अमीरबाई और उनकी चार बहनों को संगीत विरासत में ही मिला था।

1931 में अमीरबाई बीजापुर से मुंबई आ गईं। यहां देखते ही देखते वो टॉप की एक्ट्रेस और गायिका बनीं। उन्हें भारत की पहली सिंगिंग स्टार भी कहा जाने लगा। ग्रामोफोन कम्पनी भी उन्हें 1935 के जमाने में एक रिकॉर्डिंग के लिए 1000 रुपए देती थी। अमीरबाई को सॉन्ग ऑफ लव भी कहा जाता था क्योंकि उन्होंने उस जमाने में कई रोमांटिक गाने गाए थे। हालांकि खुद उनकी जिंदगी प्यार से महरूम रही।

उन्होंने उस जमाने के टॉप विलेन हिमालयवाला (अफजल कुरैशी) से शादी की थी। जो उन्हें बेइंतहा पीटता था। उनके पैसों को अपने कब्जे में रखता था। यहां तक कि उसने तलाक देने के लिए भी पैसे लिए। अमीरबाई को स्टूडियो से रिकॉर्डिंग के दौरान किडनैप किया और कमरे में बंद कर खूब मारा।

आज उनकी 58वीं डेथ एनिवर्सरी पर पढ़िए हिंदी और कन्नड़ सिनेमा की नायिका और गायिका अमीरबाई की जिंदगी से जुड़े कुछ अनछुए पहलू...

अमीरबाई को ना तो कोई बड़ा सम्मान मिला और ना ही कोई बड़ा अवॉर्ड। उन्हें कन्नड़ कोकिला की उपाधि जरूर मिली थी, लेकिन वो सम्मान कभी नहीं मिल पाया जिसकी वो वास्तव में हकदार थीं।

अमीरबाई को ना तो कोई बड़ा सम्मान मिला और ना ही कोई बड़ा अवॉर्ड। उन्हें कन्नड़ कोकिला की उपाधि जरूर मिली थी, लेकिन वो सम्मान कभी नहीं मिल पाया जिसकी वो वास्तव में हकदार थीं।

बीजापुर में पड़ा संगीत का बीज, मुंबई से गुजरात तक फला
अमीरबाई को कम उम्र से ही संगीत की तालीम मिलना शुरू हो गई थी। माता-पिता की देखरेख में वो अपनी बहनों के साथ संगीत के सुरों को साध रही थीं। उन दिनों कर्नाटक का बीजापुर थिएटर आर्टिस्ट्स का गढ़ हुआ करता था। मशहूर मराठी थिएटर आर्टिस्ट बाल गंधर्व भी अपनी नाटक मंडली के साथ बीजापुर आया करते थे। बाल गंधर्व की नजर अमीरबाई और उनकी बड़ी बहन गौहरबाई पर पड़ी। उनकी गायिकी का अंदाज उन्हें पसंद आया तो थिएटर में काम मिलने लगा।

बाल गंधर्व के थिएटर के अलावा भी अमीरबाई कुछ और मंचों पर गाने लगीं। सुर पक्के होते गए और उनका रुतबा बढ़ता गया। उन दिनों सिनेमा बढ़ रहा था। मगर तब सिर्फ मूक फिल्में ही बनती थीं। जिसमें ना गाने का स्कोप होता था और ना ही ज्यादा एक्टिंग का क्योंकि तब तक सिनेमा में औरतों का आना बुरा माना जाता था।

पहली बोलती फिल्म आलम-आरा आई और अमीरबाई मुंबई पहुंची
1931 में पहली बोलती फिल्म आलमआरा रिलीज हुई। इसके साथ ही अमीरबाई भी अपनी थिएटर की दुनिया बीजापुर में छोड़ मुंबई आ गईं। हालांकि उनके मुंबई आने का सही समय तो किसी को पता नहीं है, लेकिन बायोग्राफी में लिखा है कि आलमआरा के साथ ही अमीरबाई भी मुंबई आई थीं।

1934 में पहली फिल्म मिली, इसमें एक्टिंग भी की और गाने भी गाए
1934 में आई फिल्म विष्णु भक्ति से अमीरबाई को पहला ब्रेक मिला। इस फिल्म में उनको काम अपनी बड़ी बहन गौहरबाई के कारण मिला था, जो खुद फिल्मों में आ चुकी थीं। हालांकि इस फिल्म से उन्हें कोई पहचान नहीं मिली, ना ही उनके काम को कोई सराहना मिल पाई। 1936 में आई फिल्म जमाना के गाने “इस पाप की दुनिया से कहीं और ले चल” से उन्हें पहला बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म से उन्हें पहचान मिली और इसके बाद उन्होंने कई यादगार गाने गाए।

किस्मत ने बदली किस्मत, बनीं स्टार सिंगर
1945 में आई फिल्म किस्मत भारतीय सिनेमा की पहली ब्लॉकबस्टर मानी गई। इस फिल्म ने कई स्टार दिए। अशोक कुमार इनमें से एक थे। पहली बार एंटी हीरो का कॉन्सेप्ट हिंदी फिल्म में आया। एक ऐसा हीरो जो विलेन जैसा हो। अशोक कुमार इस फिल्म से सुपरस्टार हो गए।

इस फिल्म का ही गाना “दूर हटो ऐ दुनियावालों हिन्दुस्तान हमारा है” ब्रिटिश हुकूमत को इतना खटका था कि इसे बैन करने में अंग्रेजों ने पूरी ताकत लगा दी थी। ये फिल्म इतनी हिट रही कि इसने भारतीय सिनेमा का नक्शा ही बदल दिया। 1945 में इसने बॉक्स ऑफिस पर एक करोड़ रुपए की कमाई की थी, जो आज की तारीख में 2100 करोड़ से भी ज्यादा है।

इससे पहले उन्होंने 1942 में आई फिल्म बसंत में भी आवाज दी थी। उनका गाना “हुआ क्या कसूर, हुए जो हमसे दूर” उस दौर के सबसे हिट गानों में शामिल था। इसी फिल्म से एक बाल कलाकार का भी डेब्यू हुआ था, जिसका नाम था बेबी मुमताज। इसी बेबी मुमताज को कुछ सालों बाद वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा-मधुबाला के नाम से जाना गया।

1945 की फिल्म किस्मत में 8 गाने थे, जिनमें से 6 अमीरबाई ने गाए थे।

1945 की फिल्म किस्मत में 8 गाने थे, जिनमें से 6 अमीरबाई ने गाए थे।

एक्ट्रेसेस और गायिकाओं के सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी
ये वो दौर था जब फिल्मों में काम करना अच्छे घर की लड़कियों के लिए मना था। जो भी महिलाएं इस काम में आती उनकी तुलना वेश्याओं से की जाती थीं। अमीरबाई और उस दौर की कुछ गायिकाओं और अभिनेत्रियों ने समाज में अपने सम्मान के लिए काफी संघर्ष किया। समाज के तानों और परिवारवालों के विरोध का सामना करते हुए अपनी कला के दम पर पहचान बनाई।

उनकी बायोग्रॉफी लिखने वाले रहमत तारिकी ने लिखा है- अमीरबाई और उस समय फिल्मी दुनिया में आई लड़कियों की ये लड़ाई किसी आजादी की लड़ाई से कम नहीं थी। हालांकि इस लड़ाई को कभी इतना महत्व नहीं दिया गया, लेकिन ये इन्हीं महिलाओं की हिम्मत थी, जो अब फिल्म एक्ट्रेस बनने पर लड़कियों को शर्म नहीं, गर्व का अनुभव होता है।

विलेन से शादी, वो रियल लाइफ में भी विलेन ही निकला
अमीरबाई ने 1940 के दशक के मशहूर विलेन हिमालयवाला (अफजल कुरैशी) से शादी की। हिमालयवाला उन दिनों कई फिल्मों में खलनायक थे और उन्हें बड़ा आर्टिस्ट माना जाता था। ये शादी अमीरबाई के लिए काफी मुश्किलों भरी रही क्योंकि हिमालयवाला का व्यवहार उनके लिए ठीक नहीं था। दिन-रात झगड़े और मार-पीट का शिकार होती रहीं। हिमालयवाला उनके सारे पैसे अपने ऐशो-आराम के लिए इस्तेमाल करते। विरोध करने पर अमीरबाई के साथ मार-पीट करते थे।

तलाक के लिए किया सौदा, खूब सारा पैसा और एक कार
पति हिमालयवाला से परेशान अमीरबाई उनसे किसी भी तरह से अलग होना चाहती थीं। पति के कारण उनके सिंगिंग करियर पर भी मुश्किलें खड़ी हो गईं। एक्टिंग करियर वैसे भी कुछ खास नहीं चल रहा था और उस दौर में लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी गायिकाएं आ चुकी थीं। वैसे भी उन्हें कम ही काम मिलता था। ऐसे में अमीरबाई पति से अलग होकर अपने करियर पर फोकस करना चाहती थीं। उन्होंने पति से अलग होने के लिए उसे एक ऑफर दिया कि खूब सारा पैसा ले लो और एक कार भी, लेकिन मुझको छोड़ दो। पति भी मान गया।

पति के खराब व्यवहार की वजह से अमीरबाई कई दिनों तक डिप्रेशन में रहीं।

पति के खराब व्यवहार की वजह से अमीरबाई कई दिनों तक डिप्रेशन में रहीं।

तलाक के लिए जो कार दी, उसी से पति ने किडनैप किया
अमीरबाई ने पति को काफी सारा पैसा और एक कार दे दी। तय हुआ अब वो उनकी जिंदगी में दखलअंदाजी नहीं करेगा। पति हिमालयवाला भी राजी हो गया। पति से अलग होकर अगले दिन अमीरबाई एक स्टूडियो में रिकॉर्डिंग के लिए पहुंचीं। दिल में तसल्ली थी कि अब अपने पहले प्यार गायिकी को समय दे पाएंगीं। मगर कुछ देर बाद पति उसी कार से स्टूडियो पहुंच गया जो अमीरबाई ने दी थी।

उसने सबके सामने अमीरबाई का अपहरण किया। स्टूडियो वाले देखते रह गए। कार में बैठाकर उन्हें अपने घर ले गया और कमरे में बंद कर दिया। अमीरबाई के वकील चेलशंकर व्यास ने बयान दिया था कि उस दिन हिमालयवाला ने उन्हें कमरे में बंद कर खूब मारा था।

केस फाइल किया और लिया तलाक
इस पूरे मामले के बाद अमीरबाई ने अपने वकील चेलशंकर व्यास की मदद से कोर्ट में केस फाइल किया। उन्होंने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए। हिंसा और बदसलूकी के लंबे दौर के बाद आखिरकार उन्हें पति से तलाक मिल गया। पति से अलग तो हो गईं, लेकिन इस रिश्ते का सदमा उन्हें लंबे समय तक रहा। वो कुछ साल तक काफी डिप्रेशन में रहीं। फिर उन्होंने एडिटर बद्री कांचवाला से दूसरी शादी की। ये शादी उनके लिए सुकून भरी रही। उनका पहला पति हिमालयवाला भी विभाजन के बाद पाकिस्तान में जा बसा और पाकिस्तानी फिल्मों का काफी बड़ा एक्टर बना।

लता मंगेशकर के स्टार बनने से सिंगिंग करियर खत्म हुआ
1947 के बाद से फिल्मी दुनिया में गायिकी के लिए सिर्फ लता मंगेशकर का नाम शीर्ष पर था। उनकी बहन आशा भोसले भी काफी सराही जा रही थीं और दोनों की गायिकी से कई दूसरी फीमेल सिंगर्स का करियर हाशिए पर आ गया। अमीरबाई भी उनमें से एक थीं।

गायिकी में करियर ग्राफ गिरता देख अमीरबाई ने एक्टिंग पर फोकस करना शुरू किया। इसमें भी उन्हें लीड रोल नहीं मिलते थे। ज्यादातर सपोर्टिंग आर्टिस्ट जैसे मां, बहन, भाभी जैसे कैरेक्टर्स ही उनके हिस्से में आते थे। गायिकी के लिए अब ज्यादा स्कोप नहीं बचा था। उन्होंने परिवार और एक्टिंग पर ही फोकस करना शुरू कर दिया।

150 फिल्मों में गाए 380 गाने
अमीरबाई ने अपने करियर में कुल 150 फिल्में कीं। इन फिल्मों में उन्होंने कुल 380 गाने गाए। इसके अलावा उन्होंने कई भजन भी गाए। जिनमें गुजराती भजन “वैष्णवजन तो तेने कहिए” सबसे मशहूर भजन था। महात्मा गांधी ने भी इसे खूब सराहा। इस भजन के लिए उन्होंने अमीरबाई की खूब तारीफ भी की और अपनी प्रार्थना सभाओं में इसे गाने लगे। हालांकि अमीरबाई ने जिस लय में ये भजन गाया था और महात्मा गांधी जिस लय में गाते थे, दोनों में काफी अंतर था।

अपने शहर बीजापुर में बनाया अमीर टॉकीज
अमीरबाई ने अपने शीर्ष के दिनों में एक सिनेमाघर भी बनवाया था। कर्नाटक के बीजापुर में अमीर टॉकीज उन्हीं का बनवाया हुआ है। फिल्मों और गायिकी से उन्हें इतना लगाव था कि वो इसके अलावा कुछ और सोचती भी नहीं थीं। बीजापुर में आज भी उनका परिवार इस अमीर टॉकीज को चला रहा है।

उन्होंने पूरे कर्नाटक में शहर-शहर जाकर शोज किए। सिंगिंग प्रोग्राम और थिएटर भी किया। उनका सपना था कि लोग उनकी इस कला को वो सम्मान दें जिसकी वो हकदार हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी।

उन्होंने हिंदी के अलावा कन्नड़, मराठी और गुजराती फिल्में भी की थीं।

उन्होंने हिंदी के अलावा कन्नड़, मराठी और गुजराती फिल्में भी की थीं।

पैरालिसिस अटैक और गुमनामी में मौत
27 फरवरी 1965 को अमीरबाई को पैरालिसिस का अटैक आया। गायिकी और अभिनय की दुनिया में इतना काम करने वाली महिला की इस हालत का बाहरी दुनिया को कुछ पता नहीं चला।

4 दिन इस बीमारी से लड़ने के बाद 3 मार्च 1965 को 55 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई। उस समय भी उनके काम को वो पहचान नहीं मिली थी कि मीडिया उनकी मौत को हाथोंहाथ लेता। मौत के 4 दिन बाद अखबारों में एक छोटी सी खबर आई कि अमीरबाई कर्नाटकी का निधन हो गया है। अपनी गायिकी और अदाकारी से भारतीय सिनेमा में महिलाओं को सम्मान दिलाने वाली कलाकार की मौत के बाद लोगों को उनके होने का सही अर्थ समझ में आया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

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विलेन से की शादी, वो असल में खलनायक निकला: अमीरबाई ने तलाक के बदले पति को दी कार, उसी से अपहरण किया, कमरे म... - Dainik Bhaskar
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Wednesday, March 1, 2023

Tiger Shroff की ये 7 फिल्में तोड़ेंगी पठान का रिकॉर्ड! लिस्ट देखकर रह जाएंगे दंग - Bollywood Life हिंदी

Tiger Shroff upcoming films: बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। बता दें कि टाइगर की कई फिल्में पाइपलाइन में हैं। इस लिस्ट में गणपत से लेकर अक्षय की बड़े मियां छोटे मियां तक का नाम शामिल है।

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को-एक्टर ने किया मिसबिहेव तो नोरा ने जड़ा थप्पड़: बोलीं- हम दोनों के बीच हाथापाई हो गई थी, उसने मेरे बाल पकड़ ... - Dainik Bhaskar

17 घंटे पहले

नोरा फतेही अक्सर किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहती हैं। अब हाल ही में 'द कपिल शर्मा शो' में नोरा ने खुलासा किया कि एक बार उनके एक को-एक्टर ने उनके साथ मिसबिहेव किया था। इस वजह से उन दोनों के बीच काफी झगड़ा भी हुआ था।

नोरा ने जड़ा था अपने को-एक्टर को थप्पड़

नोरा ने लड़ाई के बारे में बात करते हुए कहा, 'हम एक फिल्म के लिए जंगल में शूटिंग कर रहे थे जब मेरे को-एक्टर ने मेरे साथ मिसबिहेव करना शुरू कर दिया। इसके बाद मैंने अपने को-एक्टर को थप्पड़ जड़ दिया था।'

नोरा के को-एक्टर ने पकड़ लिए थे उनके बाल

नोरा इस घटना के बारे में आगे बात करते हुए कहती हैं, 'फिर उस एक्टर ने मुझे थप्पड़ मारा और मेरे बाल पकड़ लिए। इसके बाद दोबारा मैंने भी उसे थप्पड़ मारा और हम दोनों के बीच हाथापाई हो गई थी। फिर हमारा बहुत बुरा झगड़ा हो गया।'

नोरा 'द एंटरटेनर्स शो' के लिए इस वक्त अमेरिका में हैं

नोरा इस वक्त 'द एंटरटेनर्स शो' के लिए अक्षय कुमार, दिशा पाटनी, सोनम बाजवा के साथ अमेरिका में हैं। हाल ही में कहा जा रहा था कि ये टूर कैंसिल हो गया है, लेकिन पूरी टीम को एयरपोर्ट पर एक साथ देख ये साफ हो गया कि ये टूर कैंसिल नहीं हुआ है।

बता दें कि अक्षय का पूरा टूर कैंसिल नहीं हुआ है, सिर्फ न्यू जर्सी वाले टूर के कैंसिल होने की खबरें हैं। लेकिन अक्षय, नोरा और कई एक्ट्रेसेस के साथ ऑरलैंडो और डालास समेत अमेरिका के कई शहरों में परफॉर्म करेंगे।

सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ 'थैंक गॉड' में नजर आई थीं नोरा

नोरा इंडस्ट्री में अपनी डांसिंग स्किल्स और फैशन सेंस के लिए जानी जाती हैं। पिछले साल दिसंबर में, नोरा ने दोहा, कतर में फीफा वर्ल्ड कप 2022 की क्लोजिंग सेरेमनी में परफॉर्मेंस दी थी। वर्क फ्रंट की बात करें तो नोरा को आखिरी बार मलाइका अरोड़ा के रियलिटी शो 'मूविंग इन विद मलाइका' के एक एपिसोड में देखा गया था। इसके अलावा वो सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​​की फिल्म 'थैंक गॉड' में भी दिखाई दी थीं।

200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में अहम गवाह हैं नोरा

नोरा 2021 से 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसी हुई हैं। इस केस में नोरा सरकारी गवाह बन चुकी हैं। इस केस में नोरा के अलावा कई एक्ट्रेसेस का नाम शामिल है, जैसे जैकलीन, चाहत खन्ना, आदि।

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OTT Release: एनिमल-कर्मा कॉलिंग... भौकाल मचा रही ये फिल्में-वेब सीरीज, वीकेंड का मजा होगा दोगुना - Aaj Tak

इस वीकेंड की लिस्ट के साथ हम तैयार हैं. अग लॉन्ग वीकेंड का मजा दोगुना करना चाहते हैं तो आप अमेजन प्राइम, नेटफ्लिक्स और सोनी लिव के अलावा जी...